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राज्य के प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन के लिए 914 करोड़ रुपए हो गए जारी नए वेतन में अब कितना बढ़कर मिलेगा जान ले।

राज्य के प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन के लिए 914 करोड़ रुपए हो गए जारी नए वेतन में अब कितना बढ़कर मिलेगा जान ले।

प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन को 914 करोड़ रुपये जारी
पटना । राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों के 66,104 शिक्षकों के वेतन के लिए 9 अरब 14 करोड़ 63 लाख 9 हजार 647 रुपये की राशि जारी हुई है। ये 66, 104 ऐसे प्रारंभिक शिक्षक हैं, जिनके वेतन पर खर्च होने वाली शतप्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षक छात्र अनुपात 1:40 करने तथा राज्य के सभी बच्चों को विद्यालय के अंदर लाने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्येश्य से राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में 3.23 लाख पंचायत, प्रखंड, नगर शिक्षकों का नियोजन किया गया है । इस प्रकार कुल 3.23 लाख नियोजित शिक्षकों के वेतन के भुगतान के लिए विभिन्न नियोजन इकाइयों को राज्य सरकार एवं समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत अनुदान की राशि दी जाती है । कुल 3.23 लाख नियोजित शिक्षकों में से 66,104 नगर, प्रखंड एवं पंचायत शिक्षकों का वेतन भुगतान राज्य सरकार की निधि से तथा शेष का वेतन भुगतान समग्र शिक्षा अभियान के मद से किया जाता है। इन्हीं 66, 104 शिक्षकों के वेतनादि मद में तृतीय चौमाही के लिए 9 अरब 14 करोड़ 63 लाख 9 हजार 647 रुपये की राशि विमुक्त हुई है।

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अप्रशिक्षित शिक्षकों की बर्खास्तगी पर लगे रोक। बिहारशरीफ :प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सूबे के सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों की बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। उसके बाद इसके अनुपालन में राज्य के विभिन्न जिलों में हजारों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। हद तो यह है कि उनके कार्यरत अवधि का भुगतान भी नहीं किया गया है। इस कारण हजारों अप्रशिक्षित शिक्षकों के आश्रित भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। इसलिए सरकार अप्रशिक्षित शिक्षकों की बर्खास्तगी पर रोक लगाए नहीं तो फिर पूरे सूबे में आंदोलन किया जाएगा। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार की असंवेदना के कारण शिक्षक दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। संघ के जिलाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस बयान जारी कहा कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री और प्राथमिक शिक्षा के निदेशक को लिखे पत्र में प्रदेश अध्यक्ष ने  कहा।

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एक मामले में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि जब तक मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है, तब तक किसी भी शिक्षक को नहीं हटाया जाए और इस बाबत उच्च न्यायालय ने राज्य के महाधिवक्ता और भारत सरकार के सोलिसिटर जनरल को निर्देश दिया था कि वे इसकी समीक्षा करें कि किसी भी शिक्षक को तत्काल पद मुक्त नहीं किया जाएगा। बावजूद, महाधिवक्ता और सॉलीसीटर जनरल ने अप्रशिक्षित शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए कोई पहल नहीं की है। इस संबंध में उन्होंने महाधिवक्ता को भी ज्ञापन सौंपा है और उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि इस लोक कल्याणकारी राज्य में उच्च न्यायालय को भी शिक्षा विभाग अंगूठा दिखा रहा है। यह कोर्ट की अवमानना ही नहीं है बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की तानाशाही का प्रमाण भी है। शिक्षकों की बर्खास्तगी पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और उनके बकाये वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो पूरे राज्य के शिक्षक राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी गुहार लगाएंगे। उन्होंने हाईकोर्ट के जज से मांग की है कि शिक्षकों से संबंधित अन्य सभी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष बेंच गठित किया जाए, अन्यथा की स्थिति में सरकार की उदासीनता और विभागीय तानाशाही के कारण राज्य में हजारों मौत हो जाएगी। जहरीली शराब से राज्य में जितनी मौत नहीं होती है, उससे ज्यादा मौत भूखमरी के कारण शिक्षकों के आश्रितों की हो जाएगी।


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