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सीएम नीतीश कुमार के बाद शिक्षा विभाग में इन जातियों के 50 हजार आबादी बाले क्षेत्र लिए शिक्षकों को जारी किया निर्देश

सीएम नीतीश कुमार के बाद शिक्षा विभाग में इन जातियों के 50 हजार आबादी बाले क्षेत्र लिए शिक्षकों को जारी किया निर्देश

जिस इलाके में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति की 50 हजार से ज्यादा आबादी है, उसमें उनके लिए माडल आवासीय विद्यालय की स्थापना होगी। इसके लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग की ओर से सभी जिलों से प्रखंड स्तर पर जमीन उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी गई है। एससी-एसटी माडल विद्यालय की स्थापना का टास्क मुख्यमंत्री की ओर से विभाग को मिला है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रत्येक माडल विद्यालय को प्लस टू तक संचालित किया जाएगा। एक स्कूल की स्थापना पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, कर्मचारियों छात्रावास वार्डन समेत नए पदों का सृजन और स्वीकृति का भी प्रस्ताव है। नए स्कूलों एवं छात्रावासों के निर्माण, अत्याधुनिक पुस्तकालयों, कंप्यूटर लैब, रिसर्च सेंटर और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना होगी। इसके अतिरिक्त विभाग द्वारा एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों के पुराने छात्रावासों को मरम्मत और आवश्यकता अनुसार नए छात्रावास का निर्माण के बारे में पर जमीन उपलब्धता की मांगी जानकारी प्राक्कलन रिपोर्ट मांगी गई है।

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80 विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संबंधी प्रशिक्षण : मौजूदा समय में प्रदेश में 65 अनुसूचित जाति आवासीय विद्यालय एवं 15 अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जहां नए साल से व्यावसायिक पाठ्यक्रम में 6000 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऐसे छात्र-छात्राओं में स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा जोर दिया जाएगा, ताकि बारहवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद आसानी से रोजगार के अवसर पा सकें।

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दूसरी व प्रीकाशन डोज के बीच नौ माह का अंतर। 
कोरोना टीके (वैक्सीन) की दूसरी डोज और प्रीकाशन डोज के बीच नौ से 12 महीनों का अंतर हो सकता है। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत में कोरोना टीकाकरण में इस्तेमाल किए जा रहे कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीकों की दूसरी और प्रीकाशन डोज के बीच अंतर पर काम किया जा रहा है। जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। पीएम नरेन्द्र मोदी ने शनिवार रात टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में घोषणा की थी कि 15 से 18 साल के किशोरों को तीन जनवरी से कोरोना के टीके लगाए जाएंगे। जबकि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को 10 जनवरी से कोरोना टीकों की प्रीकाशन डोज लगाई जाएंगी। यह फैसला कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट के बढ़ते मामलों के मद्देनजर लिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि प्रीकाशन डोज 60 साल से अधिक उम्र के उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी उनके डाक्टर की सलाह पर उपलब्ध होगी जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। प्रकाशन डोज का आशय पूर्ण टीकाकरण करा चुके लोगों के लिए तीसरी डोज से है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए सामान्यतः इस्तेमाल किए जाने वाले 'बूस्टर डोज' शब्द के इस्तेमाल परहेज किया। सूत्रों ने बताया कि टीके की दूसरी और प्रीकाशन डोज के बीच अंतर पर टीकाकरण प्रभाग और टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआइ) विचार कर रहे हैं। बता दें कि देश की 61 प्रतिशत से अधिक आबादी को टीके की दोनों डोज लग चुकी हैं।


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