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नियोजित शिक्षकों के बल्ले बल्ले हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में दिया फैसला।

नियोजित शिक्षकों के बल्ले बल्ले हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में दिया फैसला।

पटना। हाईकोर्ट ने 30 मार्च 2019 तक डिप्लोमाइन एजुकेशन नहीं करने वाले शिक्षकों को नौकरी से हटाए जाने पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने एक दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि प्राथमिक निदेशक ने 22 अक्टूबर 2019 को एक पत्र जारी कर सभी जिला शिक्षापदाधिकारी को निर्देश दिया था।

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जो शिक्षक 30 मार्च 2019 तक डीएलएड नहीं किये हैं और 12वीं कक्षा के बाद 50 प्रतिशत से कम अंक लाए, उन्हें नौकरी से हटाने की कार्रवाई करें। इस निर्देश को कोर्ट में चुनौती दी गई है।
निलंबित शिक्षक को योगदान करने का दिया गया आदेश।
मुख्यालय न तय कर छात्र हित अंकित किए जाने से नगर परिषद नियोजन इकाई पर उठ रहीं उंगलियां।

 

विभागीय नियम को धत्ता बताते हुए बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड की परीक्षा में कदाचार के मामले में निलंबित शिक्षक को नगर परिषद कार्यालय से बदलकर शहर के आरएसबी इंटर विद्यालय में योगदान देने के आदेश को लेकर नप प्रशासन सुखियों में है, बताते चलें कि बीबोस की परीक्षा के दौरान स्थानीय मोडेल इंटर स्कूल से बड़े पैमाने पर उत्तरपुस्तिकाएं गायब होने तथा नकल माफिया के बयान पर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए।

 

जबकि जाने के आरोप में विद्यालय के राजनीतिशास्त्र के शिक्षक प्रभात कुमार को नगर परिषद, समस्तीपुर के पत्रांक 1529 दिनांक 16.10.2020 द्वारा निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय नगर परिषद कार्यालय में बनाया गया था। इस मामले में जांच अभी जारी है. इसके बावजूद छात्र हित का हवाला देते हुए नप ईओ ने उक्त शिक्षक को आरएसबी इंटर विद्यालय में योगदान करने का आदेश दिया है।

 

साथ ही उक्त शिक्षक को नगर परिषद कार्यालय से बदलकर आरएसबी इंटर स्कूल में योगदान कराया जाना व वेतन भुगतान के लिए ऋणात्मक/धनात्मक प्रतिवेदन मूल विद्यालय में भेजने की प्रक्रिया किये जाने को लेकर अब संबंधित नियोजन इकाई पर उंगलियां उठ रही है। निलंबित शिक्षक व कर्मी को निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के रूप में वेतन की राशि का 50 प्रतिशत ही भुगतान किया जाना प्रावधानित है।

 

इस बाबत पूछे जाने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी वीरेंद्र नारायण ने कहा कि फिलहाल उन्हें मामले की जानकारी नहीं है, परंतु निलंबन अवधि में किसी शिक्षक का मुख्यालय विद्यालय में बनाया जाना, खासकर जब शिक्षक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज है, विभागीय नियम के सर्वथा प्रतिकूल है. विदित हो कि आरएसबी इंटर विद्यालय में है।

 

बिहार बोर्ड द्वारा इंटर व मैट्रिक परीक्षा के उत्तर पुस्तिका का बारकोडिंग व इंटर उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन का कार्य भी किया जाना है।इस संबंध में जानकारी लेने पर नगर परिषद अध्यक्ष तारकेश्वर नाथ गुप्ता ने मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि न तो उन्हें इस आशय को कोई जानकारी है न ही उनसे कोई अनुमोदन ही प्राप्त किया गया. स्पष्ट है कि इस बाबत नियोजन इकाई की कोई बैठक भी नहीं बुलायी गयी होगी।

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बिना किसी बैठक अथवा अनुमोदन के कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा इस प्रकार का आदेश जारी कर देना।
नगर परिषद कार्यालय की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, ज्ञात हो। निलंबित शिक्षक के मुख्यालय के निर्धारण में भी नगर परिषद द्वारा डीइओ से मार्गदर्शन का पेंच फंसा काफी विलम्ब व बैक डेटिंग का कार्य किया गया था. वही नप ईओ संजीव कुमार ने बताया कि निलंबित शिक्षक को विद्यालय से टैग किया गया है.


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