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सभी सरकारी स्कूल के लिए शिक्षा मंत्रालय से आ गई बड़ी खबर कक्षा पांचवी एवं आठवीं के लिए इसी सत्र से नए नियम हो जाएंगे लागू, जरूर जान ले।

सभी सरकारी स्कूल के लिए शिक्षा मंत्रालय से आ गई बड़ी खबर कक्षा पांचवी एवं आठवीं के लिए इसी सत्र से नए नियम हो जाएंगे लागू, जरूर जान ले।


1) स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में बड़े कदम की तैयारी में केंद्र बड़े कदम की तैयारी में केंद्र।
2) केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर शुरू की राज्यों के साथ व्यापक चर्चा।
3) इससे छात्रों की प्रगति और उनके रुझानों को ट्रैक किया जा सकेगा।
शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही लागू हो सकती है यह व्यवस्था
शिक्षा मंत्रालय ने इस पहल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पर अंतिम फैसला राज्यों की • सहमति के बाद ही होगा। योजना के तहत स्कूली स्तर पर होने वाली परीक्षा वार्षिक परीक्षा की तरह ही होगी, लेकिन इसका आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर होगा। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने सहित छात्रों की प्रतिभा को प्रत्येक स्तर पर आंकने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही कुछ और बड़े कदम उठा सकती है। इसके तहत तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा की परीक्षाएं भी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं जैसी आयोजित की जा सकती हैं। फिलहाल यह बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उसके जैसी होगी। इनका आयोजन भी क्षेत्रीय स्तर पर किसी उपयुक्त प्राधिकरण की देखरेख में होगा। केंद्र राज्यों के साथ व्यापक चर्चा शुरू कर चुका है।

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कई राज्यों में पहले भी पांचवीं व आठवीं के स्तर पर ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती थीं। हालांकि, वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून आने के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई, क्योंकि इस कानून के तहत आठवीं तक किसी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। इस बीच कई राज्यों ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के लिए पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को फिर से शुरू करने की पहल की है। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इसे शुरू भी कर दिया है। लेकिन तीसरी के स्तर पर अब तक इसे कहीं नहीं अपनाया गया है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने की इस पहल के तहत नए कदम की तैयारी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इसे लेकर सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों को रटकर याद कराने के बजाय उन्हें वास्तविक ज्ञान दिया जाए। साथ ही उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा जाए। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रालय अब निचले स्तर पर एक मानक तय करना चाहता है।

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हिंदी की परीक्षा से छात्रों के चेहरे खिले।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का दसवीं का होम साइंस और बारहवीं का हिंदी इलेक्टिव व हिंदी कोर का पेपर हुआ। हिंदी का दसवीं का होम साइंस का पेपर प्रश्न पत्र आसान था, लेकिन लंबा था। इसमें प्रश्न आसान और भी बिल्कुल स्कोरिंग रहा सीधे पूछे गए थे। अधिकतर छात्रों ने प्रश्न पत्र को समय रहते हल कर दिया। वहीं, दसवीं का होम साइंस का पेपर आसान और स्कोरिंग रहा। शिक्षकों के अनुसार, इन दोनों विषयों के प्रश्न पत्र में छात्र-छात्राएं अच्छे अंक हासिल कर लेते हैं। होम साइंस का पेपर हल करने वाले अधिकांश विद्यार्थी पेपर के स्तर से खुश थे, जबकि कुछ ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी। कुछ छात्रों ने कहा कि पेपर में लंबे उत्तर वाले प्रश्न उलझाने वाले थे, जबकि कुछ ने कहा कि प्रश्न पत्र संतोषजनक था। दो घंटे की समयावधि वाले इस पेपर में 35 अंक के 13 सवाल टर्म-2 के पाठ्यक्रम से पूछे गए थे।

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बारहवीं का हिंदी इलेक्टिव व हिंदी कोर का प्रश्न पत्र छात्रों को आसान लेकिन थोड़ा लंबा लगा 40 अंकों के पेपर को हल करने के लिए छात्रों के पास 2 घंटे का समय था। सेंटर से परीक्षा देकर निकले छात्रों का कहना रहा कि पेपर बहुत सीधा था, लेकिन लंबा था। इसमें साहित्य वाला भाग छात्रों को काफी आसान लगा। किसी छात्र को पार्ट-1 अच्छा लगा तो किसी को पार्ट-2 थोड़ा मुश्किल लगा। हिंदी के शिक्षकों का भी मानना है कि अच्छा और संतुलित पेपर था। शिक्षकों ने इसे टर्म-1 के हिंदी पेपर की तुलना में के संतुलित बताया। कुछ प्रश्न कठिन जरूर थे, लेकिन समझकर करने पर वह आसानी से हल हो सकते थे। एनसीईआरटी की पुस्तक का जिसने भी अच्छी तरह से अध्ययन किया होगा, उसने आसानी से सभी प्रश्नों को हल कर दिया होगा।


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