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33 प्रतिशत की उपस्थिति वाले विस्तारीकरण का पत्र जारी करने की मांग, होगा बड़ा बदलाव।

33 प्रतिशत की उपस्थिति वाले विस्तारीकरण का पत्र जारी करने की मांग, होगा बड़ा बदलाव।

पटना। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से मांग किया है कि वह स्पष्ट रूप से पत्र जारी करे। संघ के अध्यक्ष केदारनाथ एवं प्रभारी महासचिव विनय मोहन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग के ज्ञापांक 171/2016/922 दिनांक 15 अप्रैल द्वारा सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों में 33 प्रतिशत की उपस्थिति शिक्षकों को बारी-बारी से निर्धारित की गयी है । उक्त पत्र में पहले से पत्रांक 908 दिनांक 10 अप्रैल द्वारा 18 अप्रैल तक संस्थानों में शिक्षण कार्य बंद करने का निर्देश था ।

नियोजित शिक्षकों की पदोन्नति एवं वेतन को लेकर अपर मुख्य सचिव एवं प्राथमिक शिक्षा निदेशक का संयुक्त निर्देश जारी -

 

लेकिन अब इसका विस्तारीकरण करते हुए सरकार द्वारा 15 मई कर दिया गया। पूर्व के विभागीय पत्र में
प्रधानाध्यापक, प्राचार्य, प्रभारी प्रधानाध्यापक को इस 33 प्रतिशत के दायरे में शामिल नहीं किया गया है, जिससे इस कोटि के शिक्षकों में काफी असंतोष है । इस कारण विभाग 15 मई तक 33 प्रतिशत की उपस्थिति वाले विस्तारीकरण का पत्र निर्गत करने की कृपा करें ताकि शिक्षण संस्थाओं से जुड़े सभी शिक्षकों को भी इसका लाभ पूर्व की भांति मिलता रहे ।

शिक्षकों को चुनावी प्रशिक्षण में लगाने पर संघ नाराज
मुजफ्फरपुर |
कोरोना काल में शिक्षकों को चुनावी प्रशिक्षण में लगाए जाने की तिथि निर्धारण पर माध्यमिक शिक्षक संघ का आक्रोश फूट पड़ा है। संघ ने इसका विरोध करते हुए पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग की है ।बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पाण्डेय एवं प्रभारी महासचिव विनय मोहन ने इसकी मांग करते हुए कहा कि कोविड-19 के दूसरे चरण का व्यापक प्रभाव हर जगह दिखाई पड़ रहा है।

बिहार में कोरोना अप्रत्याशित प्रभाव छोड़ रहा है। तमाम मेडिकल सुविधाएँ धराशायी होती जा रही हैं। कहीं आक्सीजन सिलेंडर का अभाव है तो कहीं दवा नहीं है। इस परिस्थति में पंचायत चुनाव कराने का निर्णय राज्य के नागरिकों के लिए सही शिक्षक संघ ने की पंचायत चुनाव स्थगित करने की मांग चुनावी प्रशिक्षण के लिए तिथि निर्धारण करना सही नहीं
नहीं है ।

पंचायत चुनाव में शिक्षकों की भूमिका सर्वाधिक होती है। बिहार सरकार ने 15 मई तक सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिये हैं। काफी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं कोविड-19 के शिकार हैं। इससे कई शिक्षक काल के गाल में समा चुके हैं। जबकि इस चुनाव में हर तबके के लोगों की जनभागीदारी रहती है, जिस कारण कोरोना के विस्तारीकरण की प्रबल संभावना है। ऐसी परिस्थति में शिक्षकों को चुनावी प्रशिक्षण के लिए तिथि का निर्धारण करना कहीं से भी न्यायोचित नहीं है ।


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