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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नियोजित शिक्षकों को नहीं मिली प्रोन्नति अधिकारियों पर हो सकेगी कार्रवाई।

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नियोजित शिक्षकों को नहीं मिली प्रोन्नति अधिकारियों पर हो सकेगी कार्रवाई।

■ पटना हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के आलोक में प्रोन्नति देने के लिए कई बार पत्र लिखा गया, इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई

 

पटना। राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में 19 साल से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति नहीं मिली जबकि पटना हाईकोर्ट में संघ की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के अंदर 26 अगस्त 2016 को प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से छह महीने के अंदर प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी करने संबंधित शपथ पत्र दायर की गई थी।

तत्पश्चात प्रोन्नति नहीं मिलने पर संघ की ओर से पटना हाईकोर्ट में अवमाननावाद दायर की गई अवमाननावाद की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 13 सितंबर 2019 को तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक रंजीत कुमार सिंह को सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया। इसके बाद निदेशक ने कोर्ट में उपस्थित होकर प्रोन्नति के लिए 4 महीने का समय मांगा।

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कोर्ट ने निदेशक को 4 महीने के बदले साढ़े पांच महीने का समय देते हुए फरवरी 2020 तक हर हाल में शिक्षकों को प्रोन्नति देने का आदेश दिया। बावजूद अब तक शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं दी गई। किंतु हाईकोर्ट द्वारा अवमाननावाद में पारित आदेश की भी अवमानना कर दी गई और अब तक प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी नहीं की गई। संघ की ओर से पटना हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के आलोक में प्रोन्नति देने के लिए कई बार पत्र लिखे गए। बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होता देख एक बार फिर से परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने बुधवार को पटना हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के खिलाफ अवमाननावाद दायर किया है। यह जानकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर ब्रजवासी ने दी। उन्होंने बताया कि बेसिक ग्रेड में कार्यरत शिक्षकों को स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति देने की मांग को लेकर संघ ने वर्ष 2014 में समादेश याचिका संख्या 9494 दर्ज कराया था। इसकी सुनवाई के दौरान 26 अगस्त 2016 को निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने शपथ पत्र दायर कर यह आश्वस्त किया था कि 6 माह के अंदर प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। किंतु अदालत में हलफनामा के माध्यम से दिए आश्वासन के बावजूद विभाग द्वारा प्रोन्नति की कार्रवाई नहीं की गई जिसके बाद संघ की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए उच्च न्यायालय में अवमाननावाद संख्या 1742/2017 दर्ज कराया गया था।

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अवमाननावाद की सुनवाई के क्रम में उच्च न्यायालय ने 13 सितंबर 2019 को तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक रंजीत कुमार सिंह को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया था जिसके बाद निदेशक ने प्रोन्नति की कार्रवाई के लिए 4 महीने का समय मांगा लिया था। कोर्ट ने निदेशक को 4 माह के बदले साढ़े 5 माह का समय देते हुए सख्त आदेश दिया था कि फरवरी 2020 तक हर हाल में शिक्षकों को प्रोन्नति दे दी जाए। किंतु हाईकोर्ट द्वारा अवमाननावाद में पारित आदेश की भी अवमानना कर दी गई और अब तक प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकती है।

 

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परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ फिर पहुंचा हाइकोर्ट, लगायी न्याय की गुहार

■ शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं दिए जाने से नाराज हैं शिक्षक

■ 15 साल से सेवा में रहने वाले डीएलएड-ओडीएल प्रशिक्षित शिक्षकों को अवसर की समानता से वंचित करने की साज़िश को कोर्ट में दी चुनौती

 

किशनगंज 19 वर्षों से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति नहीं दिए जाने से क्षुब्ध होकर परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने फिर से एक बार पटना हाईकोर्ट में अवमाननाबाद दर्ज कराया है. संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने कहा है कि बेसिक ग्रेड में कार्यरत शिक्षकों को स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति देने की मांग को लेकर संघ ने वर्ष 2014 में समादेश याचिका संख्या-9494 दर्ज करायी थी, जिसकी सुनवाई के क्रम में 26 अगस्त 2016 को निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने शपथ पत्र दायर कर यह आश्वस्त किया था कि 6 माह के अंदर प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी. अदालत में हलफनामा के माध्यम से दिये आश्वासन के बावजूद विभाग ने प्रोन्नति की कार्रवाई नहीं की. इसके बाद संघ की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए उच्च न्यायालय में अवमाननावाद संख्या 1742/2017 दर्ज कराया गया था.

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अवमाननावाद की सुनवाई के क्रम में उच्च न्यायालय ने 13 सितंबर 2019 को तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक को संदेह हाजिर होने का आदेश दिया था. इसके बाद निदेशक ने उपस्थित होकर प्रोन्नति की कार्रवाई के लिए फिर से चार महीने का समय मांग लिया था. कोर्ट ने निदेशक को चार माह के बदले साढ़े पांच माह का समय देते हुए सख्त आदेश दिया था कि फरवरी 2020 तक हर हाल में शिक्षकों को प्रोन्नति दे दी जाए, पर, हाईकोर्ट द्वारा अवमाननाबाद में पारित आदेश की भी अवमानना कर दी गयी और अब तक प्रोन्नति की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है, पूरे बिहार में लंबे समय से काम करने के बावजूद किसी तरह की प्रोन्नति नहीं दिये जाने से शिक्षकों में गहरा आक्रोश है. वर्तमान में 15 साल से शिक्षक के रूप में सेवा देने वाले शिक्षकों को बीपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा में भी शामिल नहीं होने दिया जा रहा है. इस मामले में भी परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ हाइकोर्ट जाने वाला है. प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर ब्रजवासी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जब परीक्षा से ही प्रधान शिक्षक नियुक्त करने हैं तो आठ साल की सेवा करने वाले सभी शिक्षकों को परीक्षा में बैठने का अवसर दे विभाग, क्योंकि संविधान में अवसर की समानता का मौलिक अधिकार दिया गया है बावजूद विभाग का रवैया शिक्षा और शिक्षक के प्रति भेदभाव वाला है.

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अवमानना वाले मामले में श्री ब्रजवासी ने कहा कि बार-बार लिखित रूप से इसकी मांग की जाती है. पर विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण फिर से परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है और उच्च न्यायालय में फिर से हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के खिलाफ अवमाननावाद दायर किया है. संघ द्वारा फिर से अवमाननावाद दायर किये जाने पर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय मिश्रा, पूनम कुमारी, निरंजन कुमार मोदी, प्रदेश कोषाध्यक्ष केदार राय सहित संघ के सभी जिलाध्यक्ष एवं अन्य शिक्षकों ने स्वागत किया है. उम्मीद जतायी है कि अब हर हाल में प्रोन्नति की कार्रवाई होकर ही रहेगी, क्योंकि इस बार अदालत किसी भी पदाधिकारी के साथ सहानुभूति नहीं दिखाएगा और सख्त रुख दिखाएगा. जिलाध्यक्ष शाहनवाज राही, जिला महासचिव अरुण कुमार ठाकुर, जिला संयोजक शहजाद अनवर राजा, जिला कोषाध्यक्ष नादिर आलम, जिला मीडिया प्रभारी सरफराज आदिल, प्रमंडलीय उपाध्यक्ष निलेश भारती आदि शिक्षक ने कोर्ट पर आस्था रखते हुए न्याय मिलने की उम्मीद जतायी है.


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