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26 जनवरी 2023 के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में हो गए नए नियम लागू सभी सरकारी स्कूलों में लगेंगे टीवी चैनलों से होगी पढ़ाई

26 जनवरी 2023 के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में हो गए नए नियम लागू सभी सरकारी स्कूलों में लगेंगे टीवी चैनलों से होगी पढ़ाई


26 जनवरी को पहली बार बाल वाटिका योजना आएगी
मंत्री ने कहा कि इस वर्ष 26 जनवरी पर भारत सरकार नई शिक्षा नीति के तहत पहली बार बाल वाटिका योजना ला रही है। कक्षा एक व दो में पढ़ाई जाने वाली सारी पुस्तिकों का लोकार्पण बसंत पंचमी को होगा। कक्षा तीन से 12 वीं तक के लिए भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्य पुस्तक शुरू किए जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा को प्राथमिकता दी गयी है।

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1)260 टीवी चैनलों के जरिये स्कूलों में होगी पढ़ाई
2)नए भारत की शुरुआत अपनी महती भूमिका निभाएं: धर्मेन्द्र प्रधान
3) बच्चों के शैक्षणिक विकास में राष्ट्रीय शिक्षा नीति काफी अहम
4)इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान।
डेहरी (सासाराम)। डिजिटल क्रांति के युग में भारत दुनिया के अन्य देशों से आगे है। ऐसे में केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि 260 टीवी चैनलों के जरिये देश के स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। यह बातें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जिले के जमुहार स्थित गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन मंगलवार को सत्र के संबोधन में कहीं। 

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मंत्री ने कहा कि प्राथमिक व मध्य विद्यालयों के लिए 200 टीवी चैनल व उच्च विद्यालयों के लिए 60 टीवी चैनल से डिजिटल पढ़ाई होगी। ऐसा माना जा रहा है कि नई पीढ़ी के लिए यह माध्यम आकर्षक है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के डिजिटल इंडिया का लोहा पूरी दुनिया मानने लगी है हम सभी का दायित्व है। कि एक नए भारत की शुरुआत में अपनी महती भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी पूंजी यहां का इतिहास और शिक्षा है. अब तक भारत में इतिहास को गलत तरीके से लिखा गया जो अब भारत सरकार पूरी ताकत के साथ नई और सही इतिहास लिखने की ओर प्रयासरत है. इस दिशा में इतिहास अनुसंधान परिषद व अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा बहुत ही सराहनीय कार्य किया जा रहा है. अभी जो 75 पुस्तकें अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा प्रकाशित की गई है.

 इसको भारत सरकार अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं में अनुवाद कराएगा. जिससे भारत का समग्र इतिहास यहां की संस्कृति और संप्रभुता पूरी दुनिया में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.कहा कि प्रजातंत्र भारत के डीएनए में है. उन्होंने उपस्थिति लोगों से अपील किया के प्रधानमंत्री का यह सपना है के इतिहास संस्कृति यहां के रहन-सहन में उपनिवेश कि जो छाप है उसे खत्म किया जाना चाहिए. भारत सरकार इस दिशा में अग्रसर है. उन्होंने नौजवान और भावी इतिहासकारों से अपील किया कि भारत के इतिहास को लिखने के लिए भारतीय परंपरा और चेतना के अनुसार उदाहरण इकट्ठा करने में भारत सरकार की मदद करें. इसकी अलावा शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बहुत ही जल्द पूरे देश में 200 से ज्यादा एजुकेशनल टीवी चैनल शुरू करने जा रही है, जिससे शिक्षा आसानी से लोगों तक पहुंच सके.

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संगोष्ठी में सारस्वत अतिथि के रूप में नव नालांदा महावीर विश्वविद्यालय नालंदा के कुलपति प्रोफेसर श्री वेधनाथ लाभ ने अपने संबोधन में कहा कि के भारत का इतिहास और यहां का धरोहर विश्व धरोहर का केंद्र बिंदु रहा है. भारत एक राष्ट्र के रूप में हमेशा मौजूद रहा. भारत अपने मूल्यों के वजह से ही पूरी दुनिया में विश्व विख्यात रहा. इस दिशा में भारतीय इतिहास और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना प्रयासरत है. उन्होंने आशा व्यक्त किया कि हम भारत के समग्र और सही विकास इतिहास को जल्द ही पूरी दुनिया के सामने लाने में कामयाब होंगे.

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संगोष्ठी में दूसरे सारस्वत अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्याप्राकाश बंसल ने कहा कि भारत में शिक्षा का विस्तार तो हुआ पर विकास नहीं हुआ. भारत सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति इस दिशा में कार्य करेगी. जिससे शिक्षा का सही मायने में विकास संभव हो सकेगा. इससे पहले जो भी शिक्षा नीति भारत सरकार द्वारा लगाई गई वह सिर्फ पुरानी शिक्षा नीतियों का रफू करने का कार्य करती थी इस बार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लाई गई नई शिक्षा नीति असल मायने में शिक्षा तंत्र को मजबूत करने में और भारतीय संस्कृति समाज और चेतना के अनुरूप करने में सफल होगी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति आने वाले 25 वर्षों के लिए भारत के युवाओं के लिए एक प्लेटफार्म का कार्य करेगी. कार्यक्रम के दूसरे दिन संगोष्ठी की अध्यक्षता गोपाल नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति गोपाल नारायण सिंह ने किया.


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