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शिक्षक के लिए खुशखबरी सरकारी स्कूलों के संचालन में हुए भारी परिवर्तन डी ई ओ का पत्र हुआ जारी ?।

शिक्षक के लिए खुशखबरी सरकारी स्कूलों के संचालन में हुए भारी परिवर्तन डी ई ओ का पत्र हुआ जारी ?।

सभी सरकारी स्कूलों में समय संचालन को लेकर पिछले दो शनिवार उहापोह की स्थिति पर विराम लग गया है। प्रधान सचिव के निर्देश का अक्षरशः अनुपालन को लेकर डीईओ ने सोमवार को निर्देश जारी किया है। इसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक पूर्वाह्न 9 बजे से अपराह्न 4 बजे तक तथा शनिवार को पूर्वाह्न 9 बजे से अपराह्न 1:30 तक करने को कहा गया है। वहीं ग्रीष्मकाल में 6:30 से 11:30 बजे तक तथा शनिवार को 6:30 बजे से 9:30 तक ही करना है। निर्देश के अनुपालन को = लेकर सभी डीपीओ, बीईओ व सभी विद्यालय के प्रधानाध्यापक को पत्र जारी किया गया है।

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मालूम हो कि एक पखवाड़ा पूर्व एमडीएम योजना के जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक में स्कूलों के संचालन की बात उठी थी। इसमें डीएम ने डीईओ को सख्त निर्देश दिया था कि प्रधान सचिव के आदेश का जिला में अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। वर्ष 2014 में ही प्रधान सचिव ने स्कूलों के संचालन को लेकर निर्देश जारी कर रखा था। बावजूद जिला में इसका अनुपालन नहीं हो रहा था। डीईओ सत्येन्द्र झा ने बताया कि आदेश के अनुपालन को लेकर पत्र जारी दिया गया है। जिस स्कूल में इसका अनुपालन नहीं होगा वहां के एचएम पर विभागीय कार्रवाई को लेकर डीएम को पत्र प्रेषित किया जाएगा। आदेश के अनुपालन में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। कोताही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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गैर सहायता प्राप्त स्कूल के कर्मचारी भी हैं सरकारी लाभ के हकदार : दिल्ली हाई कोर्ट
निजी स्कूल के शिक्षकों की याचिका पर अहम निर्णय, तीन माह में सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन व एरियर करना होगा तय।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाते हुए कहा कि गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल के कर्मचारी भी सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों को दिए जाने वाले लाभ पाने के हकदार हैं। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव की पीठ ने संबंधित स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया कि वह सातवें वेतन आयोग के तहत याचिकाकर्ताओं के वेतन और अन्य लाभ को नियमों के अनुसार फिर से तय करे और तीन माह में बकाया भुगतान करे। तय समय में बकाया राशि के भुगतान पर कोई ब्याज नहीं होगा, लेकिन देरी पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।

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गैर सहायता प्राप्त एल्कान पब्लिक स्कूल के शिक्षकों ने अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के माध्यम से याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने जून, 2020 के महीने से लेकर अब तक के वेतन से गलत कटौती का भुगतान करने और सातवें वेतन आयोग की शर्तों को लागू करने का निर्देश देने की मांग की थी। स्कूल ने जवाबी हलफनामे में दलील दी थी कि कोरोना की स्थिति में सुधार को देखते हुए कर्मचारियों के पूरे वेतन का भुगतान अगस्त, 2021 से शुरू कर दिया था। स्कूल की वित्तीय स्थिति सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की अनुमति नहीं देती है। शिक्षा निदेशक ने पांच वर्षों से शुल्क प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया है। पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय दिया था।


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