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सरकारी स्कूल के शिक्षकों को 5 करोड़ से ऊपर का मिला खुशियों का सौगात जान ले कैसे करना है खर्चा

सरकारी स्कूल के शिक्षकों को 5 करोड़ से ऊपर का मिला खुशियों का सौगात जान ले कैसे करना है खर्चा


5.80 करोड़ खर्च करेंगी 286 स्कूलों की कमेटियां।
पटना। 16 जिलों के 286 सरकारी स्कूलों की कमेटियां 5, 80, 57, 257 रुपये खर्च करेंगी। इन सरकारी स्कूलों की कमेटियां विद्यालय शिक्षा समिति या विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति के नाम से जानी जाती हैं। कमेटियां दी गयी राशि समग्र शिक्षा के तहत असैनिक मद में खर्च करेंगी। यह राशि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए है। जिन 16 जिलों के 286 सरकारी स्कूलों की कमेटियां राशि खर्च करेंगी, उसमें अरवल, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, बक्सर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कैमूर खगड़िया, लखीसराय, नवादा, पटना, सारण एवं शिवहर शामिल हैं। इन जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों शिक्षा एवं एसएसए) को वित्तीय वर्ष 2022-23 में समग्र शिक्षा अंतर्गत असैनिक मद में विद्यालय शिक्षा समिति या विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समिति को व्यय हेतु ड्राइंग लिमिट निर्धारण को लेकर शिक्षा विभाग के सचिव असंगबा चुबा आओ, जो बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक भी हैं, द्वारा निर्देश दिये गये हैं।

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निर्देश में कहा गया है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं हेतु राशि विमुक्ति एवं उसके व्यय के प्रक्रिया का पुनर्निधारण के तहत 16 जिलों के 286 विद्यालय शिक्षा समितियों- विद्यालय प्रबंधन एवं विकास समितियों को वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रारंभिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा के असैनिक मद में अंकित गतिविधियों में व्यय हेतु 5,80,57,257 रुपये ड्राइंग लिमिट फॉर चाइल्ड एजेंसीज निर्धारित किया गया है। इस राशिको व्यय करने हेतु पीएफएमएस के वेब पोर्टल पर ड्राइंग लिमिट निर्धारित करने एवं तय प्रावधान के तहत राशि व्यय करने का निर्देश देने के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (प्रारंभिक शिक्षा एवं एसएसए) से कहा गया है। इसके तहत वेंडर या लाभुक को भुगतान पीएफएमएस के वेब पोर्टल से निर्गत ई-पेमेंट प्रिंट एडवाइस से किया जायेगा। किसी भी परिस्थिति में अन्य बैंकिंग माध्यम से भुगतान नहीं होगा। वर्तमान में आवंटित राशि का 75 प्रतिशत व्ययोपरांत ही आगामी राशि का ड्राइंग लिमिट तय होगा।

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आवेदक को पावती पर्ची देना अनिवार्य।
सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश, पावती पर्ची का माडल भी जारी।
सरकारी कार्यालयों में आवेदन की पावती पर्ची देना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर पावती न मिलने की शिकायत मिली और जांच के क्रम में सच साबित हुई तो अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेवारी तय होगी. उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होगी. सरकार का यह आदेश 2014 का ही है 2014 में कुछ दिनों तक पालन पटना हाईकोर्ट ने महेश प्रसाद बनाम राज्य सरकार मामले में आदेश दिया था कि नागरिकों से प्राप्त आवेदन की पावती पर्ची देने के लिए राज्य सरकार के एक माडल प्रारूप बनाए. 2014 के इस आदेश का कुछ दिनों तक पालन हुआ. बाद के दिनों में तो अस्पष्ट हस्ताक्षर के साथ सादे कागज पर पावती की पर्ची दी जाने लगी. सामान्य प्रशासन विभाग ने माडल प्रारूप जारी करते हुए विभागों को निर्देश दिया है कि पावती पर्ची के लिए इसी प्रारूप का उपयोग करें. सीधे और डाक से प्राप्त आवेदन पत्रों की पावती के अलग अलग प्रारूप बनाए गए हैं. इसमें प्राप्तकर्ता का पूरा नाम, पदनाम और • स्पष्ट मुहर को अनिवार्य बनाया गया है. डाक से प्राप्त आवेदन की पावती पर्ची भी डाक से ही भेजी जाएगी.


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