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सरकार में जारी किया गाइडलाइन छठी कक्षा से ऊपर के विद्यालय संचालन शुरू होंगे।

सरकार में जारी किया गाइडलाइन छठी कक्षा से ऊपर के विद्यालय संचालन शुरू होंगे।

स्कूलों में तैयारी, 6ठी से 8वीं की पढ़ाई की बारी 40 हजार स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी दो पाली में चलेंगे अधिक बच्चों वाले स्कूल।

 

1)छह फीट की दूरी पर बैठने की होगी व्यवस्था . समारोह व त्योहार जैसे आयोजन नहीं होंगे . साफ-सफाई की जिम्मेदारी शिक्षा समिति पर। 
2) सुरक्षात्मक तैयारी को होगी उत्तरदायी टीम क्लास में ही अलग-अलग लगेगी एसेम्बली शिक्षक-छात्रों के स्वास्थ्य की होगी नियमित जांच। 
3)कैंपस में बाहरी भेंडर के प्रवेश पर रोक . बच्चे घर से ही लायेंगे पका-पकाया पौष्टिक खाना।
4) परिसर की सफाई में नहीं लगाये जायेंगे विद्यार्थी . सेनेटाइज किये जायेंगे ब्लैकबोर्ड, डस्टर, बेंच-डेस्क।

शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी बुरी तरह से फंस गए।

 

पटना। राज्य के सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों में प्रति कार्यदिवस 50 फीसदी बच्चों की उपस्थिति के साथ आठ फरवरी से 6ठी से 8वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू हो जायेगी। बच्चों के साथ ही शिक्षक-कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य होगा। कक्षा में बच्चे छह फीट की दूरी पर बैठेंगे। शिक्षक-कर्मचारियों के लिए भी छह फीट की दूरी पर बैठना अनिवार्य होगा। अधिक नामांकन वाले स्कूल दो पाली में चलेंगे। हर पाली के लिए समय को परिस्थिति के अनुकूल कम करने की छूट होगी। 

 

सरकारी स्कूलों के 6ठी से 8वीं कक्षा के सभी बच्चों को दो-दो मास्क 'जीविका' के माध्यम से दिये जायेंगे। शिक्षक कर्मचारियों की उपस्थिति पूर्ण क्षमता के अनुरूप होगी। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने आठ फरवरी से स्कूलों में 6ठी से 8वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू करने को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारियों एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। राज्य में 6ठी से 8वीं कक्षा की पढ़ाई वाले स्कूलों की संख्या तकरीबन 40 हजार है।
इनमें तकरीबन 29 हजार सरकारी स्कूल हैं। चाकी तकरीबन 10 हजार प्राइवेट स्कूल हैं। ये सभी प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत रजिस्टर्ड हैं। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी दिशा निर्देश के मुताबिक सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई की सुविधा, डिजिटल थर्मामीटर, सेनेटाइजर, साबुन आदि की व्यवस्था विद्यालय शिक्षा समिति द्वारा की जायेगी।

 

 स्कूलों में आकस्मिक सुरक्षात्मक संबंधी तैयारी के लिए उत्तरदायी टीम का गठन होगा, जो विद्यालय के सेनेटाइजेशन, साफ-सफाई, सामाजिक दूरी आदि के लिए उत्तरदायी होगा। इस टीम में विद्यार्थी, शिक्षक एवं विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्य होंगे। स्टाफरूम, ऑफिस एवं विजीटर्स रूम में भी छह फीट की दूरी पर ही बैठना अनिवार्य होगा । स्कूल के प्रवेश व निकास द्वार पर अलग-अलग कक्षा के लिए अलग-अलग समय तय होंगे। स्कूल के सभी गेट आगमन और प्रस्थान के समय पूरी तरह खुले रखे जायेंगे, ताकि एक जगह भीड़ जमा नहीं हो।

 

 अभिभावकों एवं बच्चों के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग होगा। स्कूल के बाहरी वर्ग कक्ष, बाहरी नोटिस बोर्ड , दीवार आदि पर सामाजिक दूरी का पालन, मास्क लगाने। सेनेटाइजेशन, हाथ सफाई, यत्र- तत्र थूक फेंकने पर प्रतिबंध के संबंध में मुद्रित पोस्टर लगाये जायेंगे।आगंतुक कक्ष, हाथ सफाई स्थल, पेयजल केंद्र व टॉयलेट के बाहर जमीन पर वृत्ताकार चिन्ह छह फीट के दूरी पर बनाये जायेंगे। वर्ग कक्ष का आकार छोटा होने पर कम्प्यूटर रूम, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला का उपयोग छह फीट की दूरी पर बैठने के लिए किये जायेंगे।

 

 स्कूल एसेम्बली कक्षा में ही अलग- अलग क्लास टीचर के दिशा-निर्देश में लगेगी। समारोह व त्योहार जैसे आयोजन नहीं होंगे। संभव हो, तो टीचर पैरेंट्स मीटिंग वर्चुअल होगी। संभव होने पर नामांकन भी ऑनलाइन होंगे। शिक्षक एवं विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच होगी। विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता या अभिभावक से अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय यात्रा से संबंधित अद्यतन जानकारी ली जायेगी। 

 

स्कूल के अंदर बाहरी भेंडर द्वारा खाद्य सामग्री बेचने पर रोक होगी। बच्चों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा कि घर से ही पका-पकाया पौष्टिक खाना लायें। स्कूलों की नियमित सफाई होगी, लेकिन उसमें बच्चे नहीं लगाये जायेंगे। छुये जाने वाले तल यानी दरवाजे की कुंडी, डैशबोर्ड, डस्टर, बेंच-डेस्क निरंतर सफाई के साथ सेनेटाइज किये जायेंगे। यह सुनिश्चित किया जायेगा कि बच्चे मास्क अदला बदली न करें। और भी कई मानक दिशा-निर्देश में तय किये गये हैं।

 

आपको बता दें कि कोरोना से बचाव को लेकर गत 13 मार्च को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए तमाम शिक्षण संस्थान बंद करने का फैसला राज्य सरकार ने लिया। उसके अगले दिन से सभी शिक्षण संस्थान बंद हो गये। कोरोना से बचाव को लेकर 22 मार्च को राष्ट्रीय स्तर पर जनता कफ्फ्यू लगा। और, उसके एक दिन बाद पूरे देश में लॉकडाउन लागू हुआ। स्कूली छात्र- छात्राओं की परीक्षाएं भी लॉकडाउन में फंस गयीं। इसलिए कि सरकारी स्कूलों के 1ली से 8वीं कक्षा की परीक्षाएं मार्च के अंतिम हफ्ते में थीं । 

 

9वीं एवं 11वीं कक्षा की परीक्षाएं भी नहीं हुईं थीं। चूंकि, अगले माह यानी अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना था, इसलिए 1ली से 9वीं एवं 11वीं कक्षाओं के छात्र छात्रा बिना परीक्षा के ही अगली कक्षा के लिए प्रमोट कर दिये गये। अनलॉक फेज- वन शुरू हुआ, तो सरकारी प्राइमरी-मिडिल स्कूलों में मिड डे मील के अनाज बंटने शुरू हुए। इसके लिए बच्चों के अभिभावक बुलाये गये।

 

 अनलॉक के अगले चरण में स्कूलों में 5वीं एवं 8वीं कक्षा से प्रमोट हुए बच्चों के क्रमश: 6ठी एवं 9वीं कक्षा में दाखिले के लिए टी. सी. (स्थानान्तरण प्रमाण पत्र) बनने शुरू हुए । बाद में बच्चों का दाखिला भी शुरू हुआ। 11वीं कक्षा में भी बच्चों के दाखिले शुरू हुए ।

 

28 सितंबर से स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षाओं के क्लासरूम के ताले प्रतिदिन 33 फीसदी ढान-छाचाओं के लिए मएटर्शन कक्षा के नाम एर खल गटे। रस्के काट इर


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