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33 प्रतिशत शिक्षकों को बुलाए जाने के दुबारा आदेश पर आक्रोश नियमों में हुआ फिर बदलाव।

33 प्रतिशत शिक्षकों को बुलाए जाने के दुबारा आदेश पर आक्रोश नियमों में हुआ फिर बदलाव।

मुजफ्फरपुर । सरकारी स्कूलों में 33 फ़ीसदी शिक्षकों को बुलाए जाने के विभाग के द्वारा दुबारा आदेश निकालने पर गुरुवार को शिक्षकों का आक्रोश फूट पड़ा । प्राथमिक शिक्षक संघ से लेकर माध्यमिक शिक्षक संघ तक ने इस पर विरोध जताते हुए कहा कि विभाग द्वारा यह मनमानी की जा रही है । शिक्षकों की जान से जान बूझकर खिलवाड़ किया जा रहा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शिक्षकों के लिए पूर्णरूपेण स्कूल बंद कराया जाए। 

15 तक स्कूल-कॉलेज सहित सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे शिक्षा विभाग ने सभी डीएम व डीईओ को भेजकर किया बड़ा बदलाव। -

 

जब बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं तो 33 फ़ीसदी शिक्षकों को भी स्कूल में बुलाने का कोई औचित्य नहीं है स्कूल में अधिक से अधिक शिक्षक रहने पर वहां भी कोरोना फैलने का डर रहेगा। लेकिन विभाग इसको मानने को तैयार नहीं है । माध्यमिक शिक्षक संघ के अमित कुमार, मनोरंजन कुमार, टीईटी शिक्षक संघ के विवेक कुमार, शिक्षक संघ के लखन लाल निषाद समेत अन्य शिक्षक संघ ने कहा कि लगातार विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों के कोविड- पॉजिटिव होने की सूचना आ रही है।

केवी के शिक्षक बच्चों को घर से पढ़ायेंगे
केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने कोरोना वायरस के बढ़ते केस के कारण शिक्षकों को घर से ही काम करने को कहा है। केवीएस ने अपने सभी शिक्षकों को घर से ऑनलाइन कक्षाएं लेने की अनुमति दे दी है। ऑफलाइन कक्षाओं के बंद होने के बाद कई शिक्षक बारी-बारी से स्कूल आकर ऑनलाइन कक्षाएं ले रहें थे, लेकिन कोरोना के बढ़ने मामले को देखते हुए केवीएस ने यह फैसला लिया है। 

इससे पहले कई केंद्रीय विद्यालयों के कई शिक्षक कोरोना | संक्रमति हो गये थे। इस कारण केवीएस ने कहा है कि कोई भी निर्णय लेते समय | ये ध्यान रखा जाना चाहिए कि छात्रों, शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। केवीएस ने शिक्षकों से कहा है कि वर्क फ्रॉम होम करने के दौरान | वह छात्रों के किसी भी प्रकार के डाड्स क्लियर करने के लिए फोन पर उपलब्ध रहेंगे। इसी के साथ जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रिंसिपलों शिक्षकों को मिल सकते हैं। केवीएस ने शिक्षकों को निर्देश दिया कि प्रिंसिपल के बिना अनुमति के शहर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी ।

मृतक के आश्रित को सरकारी नौकरी व | बकाया राशि एकमुश्त भुगतान किया जाये। 
पटना। बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी | महासंघ (फैक्टनेब) ने एकमुश्त बकाया अनुदान राशि देने का सरकार से मांग किया है। महासंघ के प्रधान संयोजक डा शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा, राज्य संयोजक | प्रो राजीव रंजन और मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम ने कहा है कि कोरोना महामारी और अन्य गंभीर बिमारी का इलाज अथार्भाव में नहीं करा पाने के कारण काल | के गाल मे समाये संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी के | आश्रित को सरकारी नौकरी तथा लगभग नौ वर्षों का बकाया अनुदान राशि का | एकमुश्त भुगतान किया जाये।

 कोरोना महामारी के चपेट में आकर दर्जनों शिक्षाकर्मी की मौत हो गयी और सरकारी प्रावधान के बावजूद मृतक के परिजनों को किसी प्रकार का सरकारी सहायता नहीं मिल पाया महाविद्यालयों की कागजात | जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लगभग नौ वर्षों का अनुदान राशि राज्य | सरकार के पास बकाया है और शिक्षाकर्मी गंभीर बिमारी की स्थिति में पैसे के | अभाव में समुचित इलाज नहीं करा पाते है और असमय काल के गाल में समा जाते हैं। कोरोना के कारण मृत्य शिक्षाकर्मी के परिजन को सरकारी प्रावधान के | अनुसार तत्काल चार चार लाख रुपये सहायक अनुदान राशि भुगतान, मृतक | शिक्षाकर्मी का बकाया अनुदान राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाये तथा आश्रित को सरकारी नौकरी दिया जाये ।


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