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नई दिल्ली : नीति आयोग ने बुधवार को दूसरा भारतीय नवाचार सूचकांक जारी किया। इसमें कर्नाटक लगातार दूसरी बार शीर्ष पर रहा है। इस सूची में शीर्ष पांच राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल शामिल है। जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली अब्बल आई है और पूर्वोत्तर तथा पहाड़ी राज्यों की कैटेगरी में हिमाचल प्रदेश सबसे ऊपर है। वहीं, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार सबसे फिसइडी रहे हैं। ये सबसे निचले पायदान पर है। नवाचार का पहला भारतीय सूचकांक अक्टूबर, 2019 में जारी किया गया था।

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वैश्विक नवाचार सूचकांक की लर्ज पर यह सूचकांक नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और सीईओ अमिताभ कांत ने जारी किया। भारत नवाचार सूचकांक-2020 के अनुसार, बड़े राज्यों को ब्रेणी में नवाचार का औसत स्कोर 25.35 है, जबकि कर्नाटक का स्कोर 42.5 रहा है। उसने वह उपलब्धि बैचर कैपिटल डील, भौगोलिक संकेतक (जीआइ) पंजीयन तथा सूचना व संचार तकनीक (आइसीटी) के निर्यात, राज्य में अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के साथ ही नवाचार क्षमता में बढ़ोतरी के दम पर हासिल की है।

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नवाचार स्कोर 38 के साथ महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है, जबकि सबसे निचले पायवन पर रहे बिहार का स्कोरमहज 14.5 है। इस सूची में शीर्ष पांच में से चार स्थानों पर दक्षिण के राज्य काबिज रहे हैं।

सूचकांक के मुताबिक, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में औसत नवाचार स्कार 17.89 रहा है और हिमाचल प्रदेश 25 स्कोर के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद मणिपुर (22.77) और सिक्किम (22,2S) का स्थान है। इसी तरह केंद्र शासित प्रदेशों का औसत स्कोर 26.01 रहा है और दिल्ली का स्कोर सबसे ज्यादा 46.60 है। जबकि दूसरे स्थान पर चंडीगढ़ (38.57) है और इस श्रेणी में अंतिम दो स्थानों परलक्षद्वीप व जम्मू-कश्मीर रहे हैं।

सूचकांक जारी करने के कार्यक्रम में आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय तथा नीति आयोग संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए काम कर रहा ताकि देश में नवाचार के माहौल में सुधार लाया जा सके। उन्होंने कहा कि विदेश से भारतीय मेधा को वापस लाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए कुछ योजनाएं पहले से ही है और अब हम उसे धार देना चाहते हैं। हो सकता है कि यह भी एक संकेतक हो कि कौन राज्य कितनी मेधा को आकर्षित करता है।


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