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महागठबंधन में दरार, कांग्रेस से पीछा छुड़ाने की फिराक में राजद!

 महागठबंधन में दरार, कांग्रेस से पीछा छुड़ाने की फिराक में राजद!

पटना. बिहार में विधान परिषद की 24 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर मेंmahagathbandhan में कलह गहराता ही जा रहा है. राजद ने अपने सबसे बड़े सहयोगी दल कांग्रेस के बिना सहमति लिए कई सीटों पर अपने प्रत्‍याशी तय कर दिए. इधर, कांग्रेस ने भी राजद की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कमजोर नहीं समझने की चेतावनी दे डाली है. लेकिन, राजद और कांग्रेस नेताओं की माने तो राजद और कांग्रेस गठबंधन में वो मजबूती नहीं है. राजद अब गठबंधन के बंधन से अपना पीछा छुड़ाना चाह रही है. राजद प्रवक्ता मृत्युजंय तिवारी का बयान इसके संकेत हैं. यह दोनों दलों के बीच चल रहे उठा पटक की कहानी को बयां करती है.. तेजस्वी यादव  ने भी अपने लोगों के बीच गठबंधन के बंधन से मुक्ति का संकेत दे चुके हैं. कांग्रेस और उसके प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को भी इसकी सूचना है.

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राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कांग्रेस पर तंज किया कि ‘विधान परिषद चुनाव की सीटें सत्यनारायण भगवान का प्रसाद है क्या? जो इसे सभी में बांट दें? किसकी कितनी ताकत है, यह सब जानते हैं. कांग्रेस के 19 विधायक आरजेडी की वजह से ही हैं. तेजस्वी यादव सभी सीटों पर चुनाव की तैयारी में जुटे हैं. कांग्रेस को इसमें सहयोग करना चाहिए और नकारात्‍मक राजनीति छोड़नी चाहिए.’ राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मृत्युंजय तिवारी ने जो कुछ कहा है, कह जरूर वे रहे थे लेकिन ऐसा कहने का उन्हें निर्देश ऊपर से था. यही कारण था कि उन्होंने इशारों में ही कांग्रेस को उसकी जमीन दिखा दी और बाहर का रास्ता भी.

बिहार विधान परिषद की सीटों को लेकर राजद-कांग्रेस के बीच चल रही नूरा कुश्ती पर चुटकी लेते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने कहा कि राजद ने साफ कर दिया है कि यदि कांग्रेस को bihar में राजनीति करनी है तो उन्हें हर हाल में राजद के इशारों पर नाचना होगा. bjp ही नहीं, बिहार के राजनीतिक गलियारे में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है कि राजद और कांग्रेस के वर्षों पुराने गठबंधन में दरार पड़ गई है. राजद अब कांग्रेस से अपना गठबंधन तोड़ना चाह रही है.

राजद और कांग्रेस में क्यों बढ़ी दूरियां

राजनीतिक विश्लेषक लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि राजद और कांग्रेस के बीच अब पहले जैसे रिश्ते नहीं रह गए हैं. तेजस्वी यादव कांग्रेस का साथ अब नहीं चाहते हैं. उनका ऐसा मानना है कि राजद के वोट बैंक का कांग्रेस को लाभ मिलता है, लेकिन कांग्रेस के वोट बैंक का लाभ राजद को नहीं मिल पाता है. उनका यह तर्क मीडिया का बयान है. दरअसल, कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से ही आरजेडी और कांग्रेस के रिश्ते में खटास बढ़ने लगी थी. पप्पू यादव के कांग्रेस में शामिल होने के कयास के बाद दोनों के रिश्तों में अब दरार उत्पन्न हो गए हैं. पार्टी सूत्रों की माने तो राजद को विधानसभा उपचुनाव में कन्हैया और पप्पू यादव का कांग्रेस के लिए चुनाव  करना ठीक नहीं लगा. हाल के दिनों में पप्पू यादव की ओर से कांग्रेस और जदयू के नए गठजोड़ पर हर दिन दिए जा रहे बयान से भी राजद नाराज है. पार्टी सूत्रों की माने तो यही कारण है राजद अब कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन आगे नहीं रखना चाह रही है.


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