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राज्य के नियोजित शिक्षकों को जून माह के अनुपस्थिति विवरणी के साथ प्रमाण पत्र के बाद वेतन भुगतान।

राज्य के नियोजित शिक्षकों को जून माह के अनुपस्थिति विवरणी के साथ प्रमाण पत्र के बाद वेतन भुगतान।

जिला शिक्षा पदाधिकारी कौशल किशोर ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी को टीका लेने के लिए जागरूक किया जा रहा है इसके बावजूद कई शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी अब तक टीकाकरण नहीं कराए हैं। उन्होंने बताया कि जून माह में वैसे ही शिक्षकों का वेतन दिया जाएगा जिन्होंने कोरोना महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण लिया है।

सरकार में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया अब इन नियोजित शिक्षकों को वेतन बंद का आदेश।


इसके लिए एक अधिसूचना जारी करते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, विद्यालय अवर निरीक्षक एवं प्रधानाध्यापक को शिक्षक का अनुपस्थिति विवरण देने से पहले अपने शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का पहला अथवा दूसरा डोज का स्व अभिप्रमाणित प्रमाण पत्र देना होगा। फॉर्मेट में शिक्षक एवं कर्मचारी के उपस्थिति विवरण एवं नाम के सामने डोज प्रथम एवं द्वितीय का नंबर अंकित करना होगा। तभी शिक्षकों का वेतन दिया जाएगा।


आश्रितों को चार लाख देने की घोषणा करने वाला पहला राज्य बना बिहार : सुशील मोदी


बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सह राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में कोरोना से मरने वालों का संशोधित आंकड़ा किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि स्वयं स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर साफ किया उसकी मंशा हर मृतक के आश्रितों को 4 लाख रूपये का मुआवजा और अन्य सहायता दिलवाने की है। कोरोना के कारण दूरदराज के इलाकों से लेकर निजी अस्पताल और अस्पताल के रास्ते तक में मौतें हुईं, जिनके आंकड़े समय पर नहीं पहुंच पाए थे। श्री मोदी ने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के बावजूद बिहार पहला राज्य है, जिसने कोरोना से मरने वालों के परिवार को चार लाख रूपये का मुआवजा देने का फैसला किया।

इस महामारी की हर चुनौती का सामना करने के लिए कैबिनेट ने 300 करोड़ रूपये की मंजूरी दी । यदि आंकड़ा छिपाने का विपक्ष का आरोप सही होता, तो सरकार करती, न उसका अपडेट जारी करने का साहस करती। एनडीए सरकार कोरोना मृत्यु से विपदाग्रस्त एक- एक परिवार को खोज कर सबको मुआवजा दिलाने के काम में लगी है। उन्होंने कहा कि महामारी से मौत के पूरे आंकड़े विभिन्न स्रोतों से मिलने पर मुआवजा पाने के पात्र परिवारों की संख्या और बढ़ सकती है। दुर्भाग्यवश, जो लोग भारतीय वैक्सीन पर भ्रम फैलाने में लगे थे। 


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