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सबसे बड़ी खुशखबरी 5 वर्ष की नियमित सेवा को मानकर पेंशन का आधारः हाईकोर्ट।

सबसे बड़ी खुशखबरी 5 वर्ष की नियमित सेवा को मानकर पेंशन का आधारः हाईकोर्ट।

हाईकोर्ट ने पांच वर्ष की नियमित सेवा को पेंशन का आधार मानते हुए पेंशन भुगतान व 12 फीसदी ब्याज सहित शेष राशि तीन माह के भीतर दिए जाने का आदेश पारित किया।

सरकार बार-बार नियोजित शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर वेतन ये विशन करती अब संघ बर्दाश्त करने वाला नहीं होगा।

न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता रीवा निवासी विश्वनाथ तिवारी की ओर से अधिवक्ता रावेन्द्र तिवारी ने पक्ष रखा। उहोंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 1988 में जल संसाधन विभाग में दैनिक वेतनभोगी बतौर समयपाल के पद पर नियुक्त किया गया। 2004 में नियमितिकरण का आदेश जारी हुआ। इसके बाद 2010 में सेवानिवृत्त कर दिया गया। लेकिन पेंशन का पात्र नहीं माना गया। इसी रवैये के खिलाफ न्यायहित में हाईकोर्ट की शरण ली गई।

हाईकोर्ट ने पूर्व में एक याचिका का इस निर्देश के साथ निराकरण किया गया था कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।जिससे व्यथित होकर दोबारा याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद याचिकाकर्ता के हक में आदेश सुना दिया।

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बिहार के शिक्षकों को निष्ठा ट्रेनिंग का एक और अवसर

• 31 जनवरी तक शिक्षक हो सकते हैं ट्रेनिंग में शामिल
• हर शिक्षक के लिए सभी मॉड्यूल का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य

केन्द्र सरकार द्वारा बिहार समेत देशभर के शिक्षकों के लिए जारी विशेष 'निष्ठा' प्रशिक्षण नहीं लेने वाले शिक्षकों के लिए एक और मौका है। खासतौर से वैसे शिक्षकों के लिए यह अवसर है, जिन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) द्वारा विकसित 18 मॉड्यूल का प्रशिक्षण नहीं लिया है।

ऐसे शिक्षक 16 से 31 जनवरी तक आरंभहोने वाली निष्ठा ट्रेनिंग का हिस्सा बन सकते हैं। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने ऐसे शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने का निर्देश जारी किया है। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को ऐसे शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण ट्रेनिंग कार्यक्रम से जोड़ने को कहा गया है। गौरतलब है कि 'नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट' अर्थात 'निष्ठा' ट्रेनिंग की शुरुआत केन्द्र सरकार ने वर्ष 2019 में ही की थी। इसके तहत बिहार समेत देशभर के 42 लाख शिक्षकों की शिक्षण दक्षता बढ़ाने के लिए 'निष्ठा' ट्रेनिंग की अवधारणा हुई थी और इसके लिए 18 अलग अलग मॉड्यूल विकसित किया गया था। ट्रेनिंग पांच दिवसीय आवासीय मोड में परिकल्पित थी। पहले वर्ष में बिहार के 1.48 लाख शिक्षकों को निष्ठा की ट्रेनिंग दी गई। प्रारंभिक स्कूल के शिक्षकों में 62642 मध्य जबकि 1,68218 प्राइमरी शिक्षक है।

अक्टूबर में ही आरंभ हुआ था प्रशिक्षण कार्यक्रम

अक्टूबर 2020 में बिहार विस चुनाव के बीच ही बिहार के ढाई लाख शिक्षकों के लिए निष्ठा ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी गई थी। 16 अक्टूबर 2020 से होने वाले इस ट्रेनिंग कार्यक्रम को कोरोना संकट के चलते ऑनलाइन मोड में आरंभ किया गया था। इस प्रशिक्षण का मकसद स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों में लीडरशिप डेवलपमेंट के साथ ही उन्हें उनका दायित्व बोध कराना व उन्हें डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर शिक्षण पद्धति को मजबूत कराना शामिल है। बीईपी के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रविशंकर सिंह ने कहा कि शिक्षकों को 15 दिवसीय 'निष्ठा' ट्रेनिंग लेना अनिवार्य है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शिक्षकों को सर्टिफिकेट प्राप्त करने पर ही डीईओ को वेतन भुगतान करने का आदेश दिया गया है।


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