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नियोजित शिक्षकों के जनवरी-फरवरी वेतन भुगतान को लेकर हो गया सबसे बड़ा मामला हुआ उजागर।

नियोजित शिक्षकों के जनवरी-फरवरी वेतन भुगतान को लेकर हो गया सबसे बड़ा मामला हुआ उजागर।

फर्जी खाता में स्थापना कर्मी ने निकासी कर ली राशि • डीए जनवरी-फरवरी के बिल से मामला हुआ उजागर
कर्मी को शोकॉज किया करते हुए विरमित कर दिया गया है। बैंक में जमा एडवायस को मंगवाया जा रहा है। गड़बड़ी हुई राशि का आकलन कर शीघ्र राशि की रिकवरी सहित कानूनी कार्रवाई की जायेगी। -मो. नजीबुल्लाह, डीपीओ स्थापना।
नियोजित माध्यमिक शिक्षक के वेतन मद में हो रहे भुगतान में बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान करने का मामला उजागर हुआ है। स्थापना के लिपिक ने शिक्षकों के वेतन भुगतान की राशि में से करीब एक करोड़ रुपये अपने चार अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया है। इसका खुलासा तब हुआ जब शिक्षकों के डीए (महंगाई भत्ता) का बिल बैंक द्वारा रोक दिया गया। 

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बैंक ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी। जांच में सामने आया कि एक ही खाता संख्या कई बार बिल में दिया गया है। सिर्फ खाताधारी के नाम को बदल कर खाता एक ही दे दिया गया है। बैंक में खाता में जमा करने के दौरान नाम मिलान नहीं होने पर उसका सत्यापन किया गया तो यह मामला सामने आया। एडवाइस में नाम परिवर्तन कर एक ही खाता आधे दर्जन स्थान पर चढ़ा दिया गया है। इसतरह से एक ही खाता में केवल इस बढ़ोत्तरी बिल में लगभग चार लाख राशि जमा करने की कोशिश की गयी। अनुमान है कि एक करोड़ की है राशि वह चार बैंक खाता में ट्रांसफर किया है।

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बैंक ने शिक्षा विभाग की स्थापना को लौटाया बिल:संदेह होने पर बैंक ने स्थापना कmar को एडवाइस भेज दिया। इसके बाद की गयी जांच में यह मामला सामने आया कि एडवाइस बना रहे कर्मी द्वारा अधिकतर एडवाइस में फर्जी खाता जोड़कर राशि की निकासी की गयी है। जानकारी मिलते ही डीपीओ स्थापना कार्यालय में हड़कंप मच गया। एडवाइस बनाने वाले कर्मी चंद्र किशोर प्रसाद को तलब किया गया। डेढ़ साल से प्रतियोजन पर स्थापना में कार्यरत थालिपिकः लगभग डेढ़ साल से वे डीपीओ स्थापना कार्यालय में प्रतिनियोजन पर था और माध्यमिक शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रियाओं के प्रभार का काम कर रहे थे। डेढ वर्षों से वे वेतन, एरियर व अन्य मदों के भुगतान के एडवायस को तैयार कर रहे थे। उनके द्वारा इन समयावधि में तैयार सभी एडवायस की जांच की जा रही है।


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