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अब तक की सबसे बड़ी खबर सुप्रीमकोर्ट कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी की लहर बरसों का इंतजार खत्म।

अब तक की सबसे बड़ी खबर सुप्रीमकोर्ट कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी की लहर बरसों का इंतजार खत्म।

मृत नियमित शिक्षकों के आश्रितों की नियुक्ति नियमित वेतनमान व नियमित पद पर की जाएगी। मृतः सरकारी शिक्षकों के आश्रितों को वर्ग 3 व 4 के पद पर या फिर शिक्षक के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए अनुशंसा की गई हो तो उन्हें भी नियमित पद व नियमित वेतनमान पर नियुक्त किया जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने आश्रितों द्वारा दायर याचिका सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। आश्रितों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2006 में सक्षम अनुकंपा समिति ने शिक्षक के पद व वर्ग 3 एवं 4 के पद के लिए सिफारिश की थी। लेकिन उन्हें नियमित पद पर नियुक्ति नहीं कर नियोजित पद नियुक्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए वैसे आश्रितों को नियमित वेतनमान पर नियुक्ति देने को कहा है। 

नियोजित पद पर बहाल हो जाएंगे नियमित
सूत नियमित शिक्षकों के आश्रितें की नियुक्ति के लिए सक्षम अनुकंपा समिति ने अनुशंसा की थी। वैसे आश्रितों को नियमित पद पर नहीं बल्कि नियोजित पद पर बहाल कर दिया गया और उन्हें नियमित वेतनमन व नियमित पद से बाहर कर दिया। लेकिन अब सुप्रीम । कोर्ट के फैसले के बाद वैसे मृत शिक्षकों के आश्रितों की भी नियुक्ति नियमित पद व नियमित वेतनमान पर कर दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद शिक्षकों में खुशी है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के संगठन सचिव पवन कुमार प्रतापी ने कहा कि हमेशा सच्चाई की जीत होती है। राज्य सरकार ने 1 सल मृत नियमित शिक्षकों के आश्रितों को उलझा कर रखा लेकिन जीत अधिकार की ही हुई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बद पूरे शिक्षक समज में खुशी है ।

यह है मामला, शिक्षा सारथी
वर्ष 2006 से पहले मृत नियमित शिक्षकों के आश्रित की नियुक्ति | नियमित पद व नियमित वेतनमान पर की जाती थी। लेकिन, वर्ष 2006 में राज्य सरकार ने आश्रितों की नियुक्ति भी नियोजित के रूप में करने का नियम बना दिया। आश्रितों की नियुक्ति त हो गई लेकिन | उन्हें नियोजित शिक्षकों को मिलने वाल लाभ ही दिया जने लगा। इस | वीच मृत नियमित शिक्षकों के आश्रित ने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिया। सरकार की तरफ से भी इस मामले में एसएलपी दायर की गई। पर इसकी सुनवाई | करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मृत शिक्षकों के आश्रितों के पक्ष में फैसला सुनाया है।


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पटना। राष्ट्रीय जनता दल ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर शिक्षक नियुक्ति के मामले को मजाक बना कर रख दिया है। सरकार द्वारा जारी नये आदेश के अनुसार सभी स्तरों के विधालयों में शिक्षण कार्य के लिए अवकाश प्राप्त शिक्षकों को अनुबंध पर बहाल करने का निर्देश दिया गया है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि विभिन्न स्तर के विधालयों में शिक्षकों के लाखों पद रिक्त हैं।

 पर नियुक्ति प्रक्रिया को जानबूझको वर्षों से लटका कर रखा गया है। जिसकी वजह से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। सरकार का एक तुगलकी फरमान जारी हुआ है जिसके तहत अवकाश प्राप्त शिक्षकों को अनुबंध पर रखने का निर्देश दिया गया है। इसे भी एक भद्दा मजाक हीं कहा जायेगा। क्योंकि अभी कुछ ही दिन पूर्व सरकार द्वारा 50 वर्ष की आयु से अधिक के कर्मियों को उनके कार्य क्षमता को आधार बनाकर सेवा मुक्त करने का आदेश जारी किया जा चुका है।

 राजद प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को सरकार मजाक बना कर रख दिया है। 2018 में प्राथमिक विधालयों में शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। पहले उन्हें न्यायालय के चक्कर में उलझा दिया गया। दिसम्बर 2020 के दूसरे सप्ताह में ही उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र करने का निर्देश दिया गया। दो महिना बीतने के बावजूद अभी तक काउंसिलिंग की तिथि की घोषणा नहीं की गई । 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा जब पहल किया गया तो घोषणा की गई कि दो तीन दिन में काउंसिलिंग की तिथि की घोषणा कर दी जायेगी लेकिन दो सप्ताह से ज्यादा बीत गए लेकिन काउंसिलिंग की तिथि की घोषणा नहीं की गई है। इसी प्रकार एसटीइटी उतीर्ण हजारों छात्र माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विधालयों में नियुक्ति के लिए प्रतीक्षा में बैठे हैं। सरकार कान में तेल डालकर सोई हुई है।

 एक तो एसटीइटी और टीईटी की परीक्षाएं नियमित रूप से नहीं होती परीक्षा होने के बाद भी जानबूझकर परिणाम निकालने में देरी की जाती है और परिणाम निकल गया तो नियुक्ति नहीं हो रही है। राजद प्रवक्ता ने शिक्षा के साथ ही बेरोजगार नौजवानों के प्रति सरकार की मंशा ठीक नहीं है। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी से बिहार में शिक्षकों की नियमित नियुक्ति करने के साथ ही बिहार में दम तोड़ती शिक्षा व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की मांग की है।


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