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माध्यमिक शिक्षा निदेशक के इस प्रक्रिया पर राज्य निर्वाचन आयोग ने लगाई रोक।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक के इस प्रक्रिया पर राज्य निर्वाचन आयोग ने लगाई रोक।

आदर्श आचार संहिता के प्रभावी रहने की वजह से राज्य में छठे चरण के तहत जिला परिषद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति नहीं दी है। इससे आदर्श आचार संहिता के प्रभावी रहने तक जिला परिषद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया पर रोक लग गयी है। दरअसल, शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जिला परिषद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति राज्य निर्वाचन आयोग से मांगी थी। इसके जवाब में राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव के हस्ताक्षर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक को दिये गये पत्र में कहा गया है कि जिला परिषद परामर्शी समिति में जिला परिषद के एक सदस्य होते हैं।

 आदर्श आचार संहिता मार्गदर्शिका में स्पष्ट अंकित है कि केंद्र या राज्य सरकार की कोई ऐसी योजना जिसके चयन या क्रियान्वयन में पंचायतीराज संस्था के प्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका है, उनके कार्यान्वयन पर रोक रहेगी। उक्त आलोक में माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया को आदर्श आचार संहिता के प्रभावी रहने की स्थिति में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर आयोग की असहमति संसूचित की जाती है। उल्लेखनीय चरण के तहत 30 020 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की होने वाली नियुक्ति के लिए पटना उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिक्षा विभाग ने संशोधित शिड्यूल जारी किया था। संशोधित शिड्यूल के मुताबिक जिलों द्वारा नियोजन इकाईवार 30 जून, 2019 तक उपलब्ध रिक्त पदों एवं आवश्यक अतिरिक्त पदों की गणना दो अगस्त तक की जानी थी 130 जून, 2019 तक उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष विषयवार रोस्टर पंजी चार अगस्त तक तैयार की जानी थी।

 क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के स्तर पर रोस्टर क्लियरेंस 10 अगस्त तक किया जाना था। जिला द्वारा कोटिवार विषयवार रिक्ति की सूचना नियोजन इकाई को 13 अगस्त तक उपलब्ध कराना था। नियोजन इकाई द्वारा कोटिवार विषयवार रिक्ति की सूचना का प्रकाशन 17 अगस्त तक किया जाना था। 18 अगस्त से 17 सितंबर तक आवेदन लिए जाने थे। 18 सितंबर से 29 सितंबर तक औपबंधिक मेधा सूची की तैयारी की जानी थी। पांच अक्टूबर तक औपबंधिक मेधा सूची का नियोजन समिति द्वारा अनुमोदन होना था। आठ अक्टूबर तक औपबंधिक मेधा सूची प्रकाशित होनी थी। इस पर 11 अक्टूबर से तीन नवंबर तक आपत्ति ली जानी थी। 19 नवंबर तक आपत्तियों का निराकरण होना था । 22 नवंबर तक मेधा सूची प्रकाशित होनी थी । 25 नवंबर को नगर निगम के लिए मेधा सूची में सम्मिलित सभी अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों का मिलान (जांच) होना था। 26 नवंबर को जिला स्तर पर कैम्प कर नगर परिषद के लिए मेधा सूची में सम्मिलित सभी अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों का मिलान (जांच) होना था।

 27 नवंबर को जिला स्तर पर कैम्प करके नगर पंचायत के लिए मेधा सूची में सम्मिलित सभी अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों का मिलान (जांच) होना था। 29 नवंबर को जिला परिषद के लिए मेधा सूची में सम्मिलित सभी अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्रों का मिलान (जांच) होना था । उपस्थित अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र के मिलान (जांच) के आधार पर तैयार अंतिम मेधा सूची का जिला परिषद - शहरी निकाय द्वारा अनुमोदन दो दिसंबर तक होना था। नियोजन इकाई द्वारा अंतिम मेधा सूची का सार्वजनीकरण छह दिसंबर तक किया जाना था। अनुमोदित मेधा सूची एवं रोस्टर बिंदु के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची तथा विद्यालयवार एवं विषयवार रिक्ति का जिले के एनआईसी वेबसाइट पर 10 दिसंबर तक प्रकाशन होना था। उसके बाद जिला स्तर पर नियोजन इकाई द्वारा काउंसलिंग के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरण की तिथि तय होनी थी। 


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