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बरसों का इंतजार खत्म होगा शिक्षकों को मिल सकेगा अब पुरानी पेंशन योजना चरणबद्ध तरीके से ब्रजनंदन शर्मा

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पटना। राज्य के प्राथमिक शिक्षक पुरानी पेंशन योजना पुनर्बहाल करने की मुख्य मांग को लेकर देश भर के प्राथमिक शिक्षकों के साथ चरणबद्ध आंदोलन पर उतरेंगे।

आंदोलन के पहले चरण में आठ जनवरी को शिक्षक प्रखंड स्तर पर धरना देंगे तथा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे। दूसरे चरण में 22 जनवरी को जिला स्तर धरना दिया जायेगा तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे जायेंगे।बावजूद, मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर धरना और प्रदर्शन होगा।

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यह निर्णय अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान के आलोक में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य पदाधिकारियों की मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया। इसकी अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष ब्रजनन्दन शर्मा ने की। बैठक में नयी पेंशन नियमावली का रद्द करते हुए पुरानी पेंशन योजना लागू करने, नये शिक्षकों को पुराने शिक्षकों की तरह वेतनमान एवं सेवा शर्त देने, पुराने शिक्षकों के समाप्त हुए पदों को फिर से बहाल करने, पंचायत, प्रखंड एवं नगर शिक्षकों को 15 प्रतिशत बढ़ोतरी के उपरांत सप्तम वेतन में दिये गये इंडेक्स के अनुसार वेतन निर्धारण करते हुए भुगतान की व्यवस्था करने तथा पुराने शिक्षकों की तरह नये शिक्षकों को भी 10, 20 एवं 30 वर्ष पर प्रोन्नति का लाभ देने, वर्ष 2010 से स्नातक एवं प्रधानाध्यापक पद के वेतनमान में प्रोन्नति प्राप्त शिक्षकों के बीच विसंगति दूर करने, प्रधान शिक्षक-प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों को प्रोन्नति से भरने तथा10, 20 एवं 30 वर्षों की सेवा के उपरांत शिक्षकों को एमएसीपीएस योजना का लाभ देने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की गयी। बैठक में संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार, वरीय उपाध्यक्ष राम अवतार पांडेय, उपाध्यक्ष घनश्याम यादव एवं महादेव मिश्र, कोषाध्यक्ष अयोध्या पासवान, मीडिया प्रभारी प्रेमचंद्र, पटना मंडल इकाई के प्रधान सचिव मिथिलेश शर्मा एवं भोजपुर जिला इकाई के प्रधान सचिव हरेंद्र राय उपस्थित थे।

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प्रकाशकों ने खटखटाये शिक्षा विभाग के दरवाजे

पटना। तकरीबन 75 लाख रुपये की पुस्तकों की खरीदारी के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की शर्तों का विरोध करते हुये निविदा प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग शिक्षा विभाग से अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ ने की है।

इस बाबत अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्यसचिव और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ के महामंत्री अरुण शर्मा ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते वित्तीय संकट से जूझ रहे प्रदेश के सभी दो दर्जन प्रकाशक बिहार शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा लगायी गयी नयी शर्त से तकरीबन 75 करोड़ की पुस्तक क्रय योजना से बाहर हो गये हैं। इससे राज्य में पुस्तक प्रकाशन व्यवसाय से जुड़े लोगों के कारोबार पर संकट उतपन्न हो गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि नयी शर्तें जानबूझकर कर लगायी गयी है, ताकि ई-टेंडर के जरिये दिल्ली के मनचाहे बड़े सात प्रकाशकों को तकरीबन 75 करोड़ की निविदा मिल सके।

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नयी शर्त में एक प्रकाशक के लिए तीन साल में कम से कम दो करोड़ का टर्नओवर और कम से कम 50 लाख रुपये का एक आदेश के तहत केंद्र या राज्य सरकार को पुस्तक आपूर्ति है, जबकि प्रकाशकों एवं पुस्तक विक्रेताओं की इतनी बड़ी पूंजी नहीं है कि एक प्रकाशक साल में एक आदेश के तहत 50 लाख की पुस्तक आपूर्ति कर सके। खास बात यह है कि भारत सरकार के राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पुस्तक क्रय योजना में ऐसा कोई प्रावधान नहीं कर रखा है। पूरे देश में पुस्तक क्रय पर राजा राममोहन राय फाउंडेशन का नियम लागू होता है, लेकिन दिल्ली के चंद प्रकाशकों को लाभ पहुंचाने के लिए फाउंडेशन के नियम को अनदेखी कर नयी शर्तें लागू कर दी गयी हैं।


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