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16 साल के बाद राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में आ गया अब सबसे बड़ा मामला शिक्षक करे तो क्या करें सर सरकारी स्कूलों में मच गया हड़कंप।

16 साल के बाद राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में आ गया अब सबसे बड़ा मामला शिक्षक करे तो क्या करें सर सरकारी स्कूलों में मच गया हड़कंप।

राज्य में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड 16 साल पहले 2006 में ही तय हुआ उस समय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ. मदन मोहन झा थे। लेकिन, उस पर अमल इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि उसके अगले ही साल उनका निधन हो गया। डॉ. झा शिक्षा विभाग के पहले आयुक्त सह-सचिव और उससे प्रोन्नत होकर प्रधान सचिव रहे जिन्होंने ड्रेस कोड का खुद भी पालन किया। वे ड्रेस कोड के तहत काले रंग तय हुई थी। की पैंट, सफेद रंग की शर्ट, टाई, काले रंग के जूते-मोजे पहना करते थे। लेकिन, पैट और शर्ट के रंग की बात तो छोड़ दीजिये, अधिकारियों को यह भी याद नहीं कि शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड भी तय हुआ था। ऐसा इसलिए कि डॉ. मदन मोहन झा के आयुक्त सह-सचिव और प्रधान सचिव कार्यकाल में मुख्यालय में तैनात शिक्षा सेवा के प्राय: सभी अधिकारी सेवानिवृत हो चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैंप्राथमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक पद से वर्षों पहले सेवानिवृत हुए आर एस. सिंह को सिर्फ इतना याद है कि विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों के ड्रेस कोड वाला आदेश संभवत: प्रशासन से निकला था, इसलिए शिक्षा के अधिकारियों को उसकी जानकारी नहीं होगी।

डॉ. मदन मोहन झा की टीम में शामिल रहे शिक्षा सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी अनूप कुमार सिन्हा को याद है कि शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड तो तय हुआ था, लेकिन वह लागू नहीं हो पाया। शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड के तहत संभवत: पैंट का रंग काला एवं शर्ट का रंग आसमानी तय हुआ था।

महिला शिक्षकों के लिए आसमानी रंग की साड़ी या आसमानी रंग की समीज तय हुई थी।

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डॉ. मदन मोहन झा की टीम में सक्रिय रहे शिक्षा सेवा से सेवानिवृत अधिकारी रघुवंश कुमार बताते हैं कि ड्रेस कोड तय हुआ था, लेकिन उसके बारे में अब ज्यादा कुछ याद नहीं।

डॉ. मदन मोहन झा की टीम में सक्रिय रहे शिक्षा सेवा से सेवानिवृत अधिकारी मुखदेव सिंह बताते हैं कि इतना ही याद है ड्रेस कोड तय हुआ था, पर लागू नहीं हो पाया। डॉ. खुद भी ड्रेस कोड का पालन किया करते थे।

उसी टीम में सक्रिय रहे और बाद में शिक्षा सेवा से त्यागपत्र देने वाले शिक्षाशास्त्री डॉ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी को भी याद है कि शिक्षकों की ही नहीं विभाग के अधिकारियों के लिए भी ड्रेस कोड तय हुआ था।

इससे इतर वर्तमान में शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा पदाधिकारी स्तर के एक अधिकारी ने शिक्षकों के ड्रेस कोड को लेकर अनभिज्ञता जतायी। उनकी मानें, तो जिलों में जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा समय-समय पर ड्रेस कोड तय किया जाता रहा है। हाल के वर्षों में पूर्वी चंपारण के एक जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षकों के लिए तय ड्रेस कोड पर विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हुई थी, जिस वजह से वह लागू नहीं हुआ। इस बीच बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार एवं प्रवक्ता प्रेमचंद्र ने कहा है कि इंस्पेक्शन में शिक्षकों को पारंपरिक परिधान धोती कुरता और पायजामा कुरता में देख उन्हें अपमानित किया जा रहा, जबकि शिक्षकों के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं

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प्रारंभिक शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि रंजन सुमन व प्रदेश महासचिव आनंद मिश्रा ने कई जिलों में स्कूलों में शिक्षकों के पहनावे को लेकर उन्हें अपमानित करने व वेतन रोकने की हुई कारवाई पर नाराजगी जतायी है। उन्होंने कहा है कि भारतीय परंपरा में पूर्व से ही शिक्षकों के पहनावे में धोती कुरता, पायजामा कुरता सभ्य समाज में स्वीकृत रहा है। ऐसे में पदाधिकारियों द्वारा शिक्षकों पर भड़कने या कारवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। संगठन के प्रदेश सचिव राजेश्वर कुमार यादव ने कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में शिक्षकों के लिए कोई ड्रेस कोड का निर्धारण नहीं किया गया है, फिर किस आधार पर शिक्षकों को अपमानित किया जा रहा।


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