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वेतन निर्धारण में करोड़ों का घोटाला नियोजित शिक्षकों के समान वेतन की लड़ाई के दरमियान का अब हुआ खुलासा।

वेतन निर्धारण में करोड़ों का घोटाला नियोजित शिक्षकों के समान वेतन की लड़ाई के दरमियान का अब हुआ खुलासा।

बेगूसराय । नियोजित शिक्षक समान काम के बदले समान वेतन की लड़ाई लड़ते रहे तो वही नियमित शिक्षक वेतन घोटाला में मशगूल रहे, और वेतन निर्धारण में करोड़ों रुपए के घोटाले हो गए। पदाधिकारी और लिपिक ने नियमित शिक्षकों को वेतन वद्धि का लाभ देते रहे बताते चलें कि वित्त विभाग के संकल्प ८६२१, ७ दिसंबर २०१८ निर्गत होने के उपरांत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शाखा बेगूसराय ने मैट्रिक प्रशिक्षित वरीय वेतनमान प्राप्त सेवानिवश्त शिक्षकों का नियम को ताक पर रखते हुए वेतन पुन नि रण कर दिया।

शिक्षा विभाग बिहार सरकार या शिक्षा विभाग बेगूसराय द्वारा सेवानिवश्त्त शिक्षकों के वेतन पुन निर्धारण, पेंशन निर्धारण हेतु वित्तीय वर्ष २०१८-१६, एवं २०१६ - २० में कोई भी आदेश पत्र संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के लिए जारी नहीं किया गया। बेगूसराय के कार्यालय ज्ञापन २३६३, २० सितंबर २०१६ द्वारा कार्यरत शिक्षकों के मैट्रिक प्रशिक्षित वरीय वेतनमान की तिथि में संशोधन किया गया है। जिसमें वित्त विभाग के संकल्प ८६२१, ७ दिसंबर २०१८ के अनुरूप वेतन निर्धारण का निर्देश जारी किया गया था। बताते चलें कि मैट्रिक प्रशिक्षित वरीय वेतनमान प्राप्त शिक्षकों को किसी पद का प्रवेश वेतनमान स्वीकृत नहीं होना था। लेकिन बेगूसराय में लगभग एक हजार शिक्षकों को ६ से ८००० मूल वेतन में वशद्धि कर दी गयी।

बताते चलें कि वेतन निर्धारण वैसे शिक्षकों का होना था जो १ जनवरी २००६ के पूर्व के शिक्षक हैं अर्थात जिनका १२ वर्ष का सेवाकाल पूरा हो गया था। लेकिन । ३१ अगस्त २००६ को जिनका १२ वर्ष पूरा हुआ वह भी १ जनवरी २००६ के आधार को मनवा कर वेतन वद्धि का लाभ ले लिए। जबकि दोनों लेवल के शिक्षक का वेतन ४६०० मूल वेतन है । १ जनवरी २००६ के पूर्व वाले शिक्षक को वेतन वद्धि होकर १७ हजार १४० रुपए लेना था । वही १ अगस्त १६६४ में बहाल शिक्षकों का वेतन वद्धि होकर १६६४० ही मिलना था। लेकिन एक हजार के लगभग शिक्षकों ने १६६४० की जगह १७१४० रुपए ले लिए।

सबसे दिलचस्प है कि शिक्षकों ने बकाया एरियर २ लाख से ५ लाख तक निकासी भी कर लिए यह मामला तब उठा जब डीडीओ चेरिया बरियारपुर संजय कुमार ने वेतन निर्धारण पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जिसके बाद तत्कालीन डीपीओ रवि कुमार ने संजय कुमार को डीडीओ पद से मुक्त कर दिया जिसके बाद डीडीओ ने शिक्षा विभाग निदेशक को वित्तीय अनियमितता से अवगत कराया वहीं यह मामला कोई एक जिला का नहीं है बल्कि कई जिला में इस तरह की गड़बड़ी हुई है जबकि शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को जानकारी थी इसके बावजूद वेतन वद्धि दे दिए और करोड़ रुपए का वेतन घोटाला हो गया। बताते चलें कि ७०० के लगभग शिक्षक अवकाश ग्रहण कर चुके हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि उन सभी शिक्षकों पर शिक्षा विभाग की क्या कार्रवाई होगी।


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